निभाषा संस्कृ नत-िेख -मियािम का प्राचीि सानहत्य-प्रज्ञा पररषद् , पटिा, जििरी-माचश -2015
संघषश ई जेिशि -िेख-उत्तर आधुनिकता के आईिे में दनित निमर्श- ि ि 4-इर्ू -2-अप्रैि -जूि 2015
संघषश ई जेिशि -िेख -सांप्रदानयकता का स्वरुप और निकास -ि ि 4, इर्ू -4, अक्टूबर-नदसंबर -2015
सानहत्य की समकािीि चुिौनतयां -िेख -समकािीि नहंदी कहानिय ं में सांप्रदानयकता की चुिौनतयां -सं. िॉ.बाबू ज सेफ, अिैद प्रकार्ि, नदल्ली, प्रथम संस्करण -2020
नहंदी कनिता ब ध से मीमांसा तक -िेख -मुक्तिब ध अँधेरे में उजास की तिार् , सं.कुमार सौरभ, िेतीओं प्रेस, नदल्ली, प्रथम संस्करण -2020
नहंदी उपन्यास ं में दनित जीिि संघषश -िेख -जख्म हमारे उपन्यास में दनित उत्पीड़ि और सांप्रदानयकता की गूँज – सं भारत मि ज कुमार-अिुज्ञा प्रकार्ि – प्रथम संस्करण -2020